मेरी वफादारी की बात करते हो,
और सरेराह मेरी मोहब्बत नीलाम करते हो।
तुम क्या जानोगे मन को मेरे,
जब किन्ही और नजरो से मेरे चेहरे की पहचान करते हो।
एक बीज बो दिया है किसी ने,
मेरी ज़मीन पर देखो,
रोज़ पानी भी देता है,
रोज़ माटी की खुदाई भी करता है,
बढ़ जाने दो इसे पेड़ में,
फल जैसे भी हो,
खाने उसे भी होंगे।