Monday, August 17, 2020

अलसाई  सी आँखों में 

कुछ अलसाए से ख़्वाब पड़े।

कुछ धूप में तपते हैं

कुछ शाम संग भीग जाते हैं।

कुछ  बैठ मुंडेर पर ताकते है,

हर दिन एक उम्मीद नई

हर रंग देख लिए मैंने

इस बेमानी दुनिया मे,

रात तो काली ही होती है,

पर सुबह भी बेरंग होती है।।



No comments:

Post a Comment