मेरे तल्ख़ रुख को बदसलूकी समझता है,
कहने को वो अपना है, क्या खाक़ अपना है।
जिसकी आँखे देखती हो हमे दुसरो की नज़र से,
जो मेरे अल्फाजो के मायने दुसरो से समझता हो,
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